प्रदीप सेठिया बड़वाह। निमाड़ क्षेत्र की पहचान संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और पवित्र नर्मदा नदी के कारण है। ओंकारेश्वर भौगोलिक रूप से खंडवा और खरगोन जिलों का केंद्र बिंदु होने के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
वर्तमान में क्षेत्र की कनेक्टिविटी नेशनल हाईवे, ब्रॉडगेज रेलमार्ग और इंदौर एयरपोर्ट से सुगमता पूर्वक जुड़ी हुई है, जिससे ओंकारेश्वर को नए संभाग मुख्यालय के रूप में विकसित करना सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। विशेषज्ञों और क्षेत्रीय नागरिकों का मानना है कि,
खंडवा या खरगोन को संभाग मुख्यालय बनाने की अलग-अलग मांगों का संतुलित समाधान केवल ओंकारेश्वर में ही संभव है। इस नए संभाग का नाम “ज्योतिर्लिंग निमाड़ संभाग” रखा जाना भी क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा।
ओंकारेश्वर के पास बड़वाह और सनावद क्षेत्र में पर्याप्त भूमि एवं भवन उपलब्ध हैं, जो प्रशासनिक दृष्टि से मुख्यालय के लिए पूरी तरह उपयुक्त माने जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि बड़वाह, महेश्वर और सनावद क्षेत्र के लोगों के लिए इंदौर वर्तमान में अधिक अनुकूल मुख्यालय है,
लेकिन यदि नया संभाग ओंकारेश्वर के नाम से गठित होता है, तो यह क्षेत्र भी पूरी तरह सहमत और लाभान्वित रहेगा, क्योंकि खंडवा और खरगोन की तुलना में ओंकारेश्वर इन इलाकों के अधिक निकट और सुविधाजनक है।
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निमाड़ के लोगों की यह लंबे समय से उठ रही मांग अब प्रशासनिक और भौगोलिक दोनों दृष्टियों से मजबूत तर्कों के साथ सामने आ रही है।
