तलून की रात्रि चौपाल में कलेक्टर का किसानों को मंत्र: नए प्रयोगों से बढ़ेगा मुनाफा, एचडीपीएस से कपास उत्पादन बढ़ाने पर जोर

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ऑनलाइन न्यूज बड़वानी 

दिनांक 02/06/2026 ब्यूरो रिपोर्ट 

कृषक कल्याण वर्ष-2026: प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज और मृदा परीक्षण को बताया खेती की सफलता का आधार

 

बड़वानी। कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत बड़वानी विकासखंड के ग्राम तलून में आयोजित रात्रि चौपाल में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। चौपाल में कलेक्टर श्रीमती जयती सिंह ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ कृषि में नए प्रयोग और आधुनिक पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। जब तक किसान नई तकनीकों को स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक खेती को पूरी तरह लाभ का जरिया नहीं बनाया जा सकता।

कलेक्टर ने किसानों से आह्वान किया कि वे केवल खेती करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं आधुनिक कृषि के मार्गदर्शक बनें और अन्य किसानों को भी नई तकनीकों के प्रति प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ व लाभकारी बनाना है।

कपास में एचडीपीएस पद्धति से बढ़ेगी पैदावार

चौपाल में कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (एचडीपीएस) को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस पद्धति में पौधों और कतारों के बीच दूरी कम रखी जाती है, जिससे प्रति एकड़ पौधों की संख्या बढ़ती है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। प्रशासन द्वारा जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में एचडीपीएस मॉडल विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि किसान इसके परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें।

उन्नत किस्मों की जानकारी देकर किया जागरूक

कृषि विशेषज्ञों ने एचडीपीएस पद्धति के लिए उपयुक्त कपास की उन्नत किस्मों की जानकारी दी। इसमें ATCH-605, सुरक्षा, शक्ति, PKV-081 और CNA-1054 जैसी किस्में शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इन किस्मों के पौधों का फैलाव कम होता है, लेकिन इनमें गूलरों की संख्या अधिक होने से घनी खेती में बेहतर उत्पादन मिलता है।

लंबे रेशे वाली कपास से बढ़ेगी आमदनी

किसानों को बाजार की मांग के अनुसार खेती करने की सलाह देते हुए मध्यम और लंबे रेशे वाली कपास की खेती अपनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे कपास को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है, जिससे किसानों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि होती है।

प्राकृतिक और जैविक खेती को मिला बढ़ावा

रात्रि चौपाल में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत रसायन मुक्त खेती अपनाने का संदेश भी दिया गया। किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैविक खेती के लिए बीज प्रमाणीकरण प्रक्रिया और जिले में विकसित किए जा रहे जैविक क्लस्टरों की जानकारी भी किसानों को दी गई।

हर तीन साल में कराएं मिट्टी की जांच

कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रत्येक तीन वर्ष में अपनी कृषि भूमि की मिट्टी का परीक्षण अवश्य कराएं। साथ ही गोबर खाद और जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।

चौपाल में संयुक्त कलेक्टर, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किसानों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन के सामने रखे।