डूब प्रभावित नाविक ने बसाहट में बनाया मिट्टी, लकड़ी, कवेलु का मकान… नाम दिया ‘नर्मदाई’ यानी सुख देने वाली वाटिका

✍️ ध्रुव वाणी न्यूज बड़वानी 

देशभर बढ़ते रहे निर्माण कार्य के लिए अधिक रेत और सीमेंट का उपयोग होने से पारंपरिक गृह निर्माण की तकनीक बदल गई है। इससे रेत खनन और सीमेंट की खदानें प्रकृति पर, ग्राम वासियों पर नदी, जल पर आघात कर रही है; जिसमें अवैधता भी साबित हो रही है! पर्यावरणीय कानून का उल्लंघन हो रहा है।

इसलिए वैकल्पिक तकनीक से प्राकृतिक, स्थानीय संसाधनों का उपयोग ही अधिकतर करके गृह निर्माण , यह आज एक बेहद जरूरत बनी है।

इसी का प्रात्यक्षिक नर्मदा घाटी के पवन केवट नाम के, पीढ़ियों से नाविक समाज के रहे,एक युवा साथी का घर बनाने में कुछ आर्किटेक्टस,अनूप रंगोले और दीक्षा बहन का मार्गदर्शन मिला और तितली बहन, विकास की अवधारणा पर अध्ययन कर चुकी युवती का भी सहयोग और प्रोत्साहन।

नर्मदा आंदोलन के साथी पवन केवट से जुड़े रहे। आज पवन केवट का मकान, जिसे प्रकृति, नदी, बिरसा मुंडा, जैसे रंग-बिरंगे चित्रों से संजय भोसले जैसे प्रकृति प्रेमी कलाकार के द्वारा सजाने पर जो अधिक सुंदर बन गया है।

इसके उद्घाटन अवसर पर अनेक माता बहने, ग्राम वासियों के साथ मौजूद रहे कनक सिंह दरबार, हरिओम कुमावत, गजानन यादव, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिलाध्यक्ष अब्दुल सादिक चंदेरी और नर्मदा आंदोलन के कमल यादव, प्रतिक पाढेन, कैलाश गोस्वामी तथा वरिष्ठ समाजसेवी मेघा पाटकर उपस्थित रहे। मेधा दीदी ने सभी को समझाया महत्व नई तकनीक का तथा गीत सुनाया कुदरत से खिलवाड़ किया तो कुदरत बदला लेगी।

पवन केवट ऐसा नाविक जिसने 2019 में सरदार सरोवर की बड़ी डूब से ग्रस्त होते गए राजघाट के निवासी, उनका सामान, मवेशी बचाने में बड़ा योगदान दिया था; उसकी आज 19 अप्रैल को ही शादी की शुरुआत भी हुई है, मंडप हल्दी से। पवन का मकान का नाम दिया गया है नर्मदाई यानी सुख देने वाली वाटिका।इस कार्यक्रम में सभी ने इस अनोखे निर्माण और उद्घाटन कार्य पर खुशी व्यक्त की और सब दूर इस निरंतर और न्याय पूर्णता को आधार बनती तकनीक को प्रसारित करने का निर्णय लिया।। कई माध्यमकर्ता पधारे तो उन्होंने भी इस नवनिर्माण को अपने माध्यम से उजागर किया।