नहर में पानी नहीं, सूख रही फसलें; 11 गांवों के किसान पहुंचे कलेक्टर कार्यालय

12 अक्टूबर को आवेदन देने के बाद भी नहीं मिली राहत, किसानों का आरोप—आधी फसल बर्बाद, अब रबी की बुवाई पर भी संकट

 

दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी

जिले के पिछोड़ी क्षेत्र के 11 गांवों में नहर का पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने और फसलों पर संकट गहराने के बीच किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर नहर में जल्द पानी छोड़ने की मांग की। किसानों का कहना है कि उन्होंने 12 अक्टूबर को भी आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया था, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है।

 11 गांवों में सिंचाई का संकट

पिछोड़ी गांव से पहुंचे किसान नेपाल पटेल ने बताया कि सौंदुल, पाल्या, नयनपुरा, सिरसानी, कठोरा, पिछोड़ी, बलखड़, बोम्या, कल्याणपुरा, नंदगांव और भीलखेड़ा में नहर से पानी नहीं मिल रहा है। बारिश कम होने के कारण कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर भी नीचे चला गया है। किसानों के अनुसार, पानी के अभाव में आधी फसल नष्ट हो चुकी है, जबकि बची हुई फसल भी सूखने की कगार पर है।

नर्मदा पास, लेकिन सिंचाई का विकल्प नहीं

किसानों ने बताया कि नर्मदा नदी पास में होने के बावजूद नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण मोटर लगाकर सिंचाई करना संभव नहीं हो पा रहा है। कई किसान निजी कुओं के सहारे जैसे-तैसे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि सनावद और बड़वानी क्षेत्र में लंबे समय से नहर में पानी चल रहा है, लेकिन पिछोड़ी क्षेत्र के गांव अब भी पानी का इंतजार कर रहे हैं।

 

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पानी मिलने में देरी से रबी की बुवाई पर असर

किसानों के मुताबिक, इंदिरा सागर परियोजना का पानी इस क्षेत्र तक पहुंचने में 20 से 25 दिन लग जाते हैं। ऐसे में यदि नहर में जल्द पानी नहीं छोड़ा गया, तो रबी की फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है। किसानों ने बताया कि उन्हें अधिकारियों की ओर से अब एक तारीख तक पानी छोड़ने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, उनका कहना है कि पिछली बार भी 12 तारीख को पानी छोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन पानी नहीं पहुंचा।

खेती के लिए पानी नहीं मिलने से किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। कुछ किसानों को खेती छोड़कर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से जल्द नहर में पानी छोड़ने की मांग की है, ताकि बची हुई फसल को बचाने और रबी की बुवाई शुरू करने का अवसर मिल सके।

अब किसानों को इंतजार है कि नहर में पानी कब छोड़ा जाएगा और उन्हें फसल बचाने के साथ रबी की बुवाई शुरू करने के लिए राहत कब मिलेगी।