सड़क पर गिट्टी-पत्थरों का बिछा जाल, वाहन गुजरते ही उड़ते धूल के गुबार; परिक्रमा वासियों की राह हुई मुश्किल

बस स्टैंड से सिद्धेश्वर मंदिर तक बदहाल मार्ग बना मुसीबत, वाटर बाउंड मैकडम (डब्ल्यूबीएम) भी उखड़ने लगा; 10 करोड़ का डिवाइडर रोड प्रोजेक्ट वित्तीय स्वीकृति के इंतजार में

दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी

शहर में एक ओर नए डिवाइडर रोड की सुविधा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर बस स्टैंड से राजघाट रोड स्थित सिद्धेश्वर मंदिर तक का मार्ग लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर बिखरी गिट्टी-पत्थर और वाहनों के गुजरते ही उड़ते धूल के गुबार से राहगीर परेशान हैं। वर्षाकाल के बाद नर्मदा परिक्रमा वासियों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। ऐसे में पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग चुनौती बनता जा रहा है।

वाटर बाउंड मैकडम से मिली राहत, अब फिर बढ़ी परेशानी

वर्षाकाल में सड़क पर गड्ढों, कीचड़ और जलभराव से लोग परेशान थे। मार्ग की बदहाली के विरोध में विपक्ष ने गड्ढों में बैठकर प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद नगर पालिका ने राहत के तौर पर वाटर बाउंड मैकडम (डब्ल्यूबीएम) पद्धति से सड़क की मरम्मत कराई। हालांकि, वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण गिट्टी-पत्थर फिर उखड़ने लगे हैं। इससे धूल उड़ने के साथ राहगीरों को चोट लगने और दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।

स्कूल, अस्पताल और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता

बस स्टैंड से सिद्धेश्वर मंदिर तक के इस मार्ग पर स्कूल, अस्पताल, मंदिर, मस्जिद, पेट्रोल पंप और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। आसपास की कॉलोनियों और बस्तियों के लोग भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा पर निकले श्रद्धालु भी बड़वानी से राजघाट की ओर इसी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। सड़क पर फैले पत्थर और उड़ती धूल उनके लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं।

10 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार

नगर पालिका ने कारंजा से अंजड़ रोड तक डिवाइडर सड़क का निर्माण कराकर शहर को नई सुविधा दी है। इसके बाद ओलंपिक सर्कल से कारंजा होते हुए बस स्टैंड तक डिवाइडर रोड की कनेक्टिविटी उपलब्ध हुई है। लेकिन बस स्टैंड से राजघाट रोड स्थित सिद्धेश्वर मंदिर तक सड़क की समस्या अब भी बरकरार है।

इस मार्ग के निर्माण और डिवाइडर रोड के लिए करीब 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है। फिलहाल वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से परियोजना लंबित है। ऐसे में लोगों को स्थायी समाधान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि श्रद्धालुओं और शहरवासियों को राहत देने के लिए सड़क की स्थायी मरम्मत कब होगी?