विस्थापितों के सवालों पर लंबी बैठक, भूखंड-मुआवजे से लेकर पुनर्वास तक कार्रवाई का आश्वासन

साढ़े आठ घंटे की बैठक में 25 से अधिक मुद्दों पर मंथन; भूखंड, मुआवजे और लंबित किस्तों पर भी अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का भरोसा 


दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी


नर्मदा घाटी के विस्थापितों के लंबित पुनर्वास मामलों को लेकर बुधवार को भू-अर्जन एवं पुनर्वास कार्यालय में अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच साढ़े आठ घंटे तक चर्चा हुई। बैठक में 25 से अधिक मुद्दे उठाए गए। सबसे अहम निष्कर्ष वर्ष 2019 में डूब प्रभावित घरों से हटाकर टीनशेड में रखे गए परिवारों की पात्रता के मामलों में 5 नवंबर तक निर्णय देने का आश्वासन रहा। इसके बाद दो दिन से जारी सत्याग्रह समाप्त कर दिया गया। हालांकि, सभी मांगों का निराकरण नहीं हुआ है।

टीनशेड में रह रहे परिवारों के मामलों की जांच


चर्चा में अंजड़ या पाटी नाका क्षेत्र के बड़े टीनशेड में रह रहे परिवारों की पात्रता की जांच कर निर्धारित समयसीमा में निर्णय देने की बात कही गई। आंदोलनकारियों की ओर से मेधा पाटकर और राहुल यादव ने विस्थापित परिवारों के लंबित पुनर्वास अधिकारों का मुद्दा उठाया।

भूखंड और मुआवजे पर जानकारी देने का भरोसा


बड़े भूखंड लौटाकर नकद राशि लेने वाले परिवारों को छोटे भूखंड देने, वर्ष 1992 से 1999 के बीच के 3,491 परिवारों की सूची के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने और पिछोड़ी में जमीन की उपलब्धता व सीमांकन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दो हेक्टेयर डूबी जमीन के बदले 60 लाख रुपये की पात्रता, प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित किस्तों तथा महिला और संयुक्त खातेदारों के मामलों पर भी जवाब मांगे गए।

कई मुद्दों पर अभी निर्णय बाकी


राजघाट के दुकानदारों, छोटा बड़दा के विस्थापितों, केवट समाज, भूमिहीन परिवारों, मछुआरों और पुनर्वास स्थलों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों, अवैध रेत खनन और नर्मदा प्रदूषण पर भी चर्चा हुई, लेकिन इन सभी मामलों का अंतिम निराकरण सामने नहीं आया है।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद सत्याग्रह समाप्त हुआ। अब 5 नवंबर तक होने वाली कार्रवाई अहम होगी, क्योंकि विस्थापित परिवारों को आश्वासन के साथ ठोस निर्णयों का इंतजार है।