बड़वानी-खरगोन की सीमा पर 7,100 पौधों की अवैध खेती का खुलासा, 3.5 किलोमीटर दुर्गम रास्ते के भीतर मिले दो खेत
दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी
जिले में मादक पदार्थों की अवैध खेती का एक और बड़ा मामला सामने आया है। बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर की पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से दो दिन तक जंगल और पहाड़ियों के दुर्गम इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाकर गांजे की अवैध खेती का खुलासा किया। ग्राम पंचायत खपाड़ा के अंतर्गत गंदायलापानी और खरगोन जिले के केलीअंबा के बीच दो अलग-अलग खेतों में गांजे के 7,100 हरे पौधे मिले। पुलिस के मुताबिक जब्त गांजे का कुल वजन 18 क्विंटल 12 किलो और अनुमानित कीमत 90 लाख 63 हजार रुपये है।

पुलिस ने 7 से 8 अक्टूबर के बीच यह कार्रवाई की। मौके पर वीडियोग्राफी और जीपीएस लोकेशन दर्ज की गई। थाना वरला में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। अब पुलिस वन भूमि पर खेती करने वालों और जमीन पर कब्जा रखने वालों की पहचान में जुटी है। लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है—जंगल और पहाड़ियों के बीच इतने बड़े क्षेत्र में गांजे की फसल तैयार हो गई और इसकी जानकारी पुलिस को मुखबिर से मिलने के बाद ही क्यों सामने आई? क्या ऐसे दुर्गम इलाकों में पहले से निगरानी की कोई व्यवस्था थी? यदि थी, तो अवैध खेती करने वालों को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा जा सका? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
दो खेतों में लहलहा रही थी गांजे की फसल, 90 लाख से ज्यादा कीमत
पुलिस की कार्रवाई में दो अलग-अलग स्थानों पर गांजे की खेती मिली। पहले खेत में उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह चौहान की टीम ने 2,900 पौधे जब्त किए। इनका कुल वजन 8 क्विंटल 1 किलो और अनुमानित कीमत 40 लाख 5 हजार 250 रुपये बताई गई है। वहीं, दूसरे खेत में उपनिरीक्षक छन्नूलाल चौहान की टीम ने 4,200 पौधे जब्त किए। इनका कुल वजन 10 क्विंटल 11 किलो और अनुमानित कीमत 50 लाख 57 हजार 750 रुपये आंकी गई है।

दोनों स्थानों से कुल 7,100 पौधे जब्त किए गए, जिनका वजन 18 क्विंटल 12 किलो और अनुमानित कीमत 90 लाख 63 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार, दोनों स्थानों पर अवैध खेती की सूचना मिलने के बाद संयुक्त टीमों ने मुख्य मार्ग से करीब 3.5 किलोमीटर अंदर दुर्गम इलाके में पहुंचकर कार्रवाई की।
चार जिलों की पुलिस पहुंची, तब खुला अवैध खेती का मामला
पुलिस मुख्यालय भोपाल के विशेष अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर जिले की पुलिस टीमों ने हिस्सा लिया। पुलिस महानिरीक्षक अनुराग और निमाड़ रेंज की डीआईजी सिमाला प्रसाद के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल के नेतृत्व में अभियान चलाया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर और सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे के मार्गदर्शन में पुलिस टीमों ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान जीपीएस से स्थान की जानकारी दर्ज करने के साथ वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि जब्ती और संबंधित स्थानों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।
बड़ी कार्रवाई के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल ?
जिले में गांजे की खेती का इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर अवैध खेती कब शुरू हुई? पौधे किसने लगाए और उनकी देखरेख कौन कर रहा था? तैयार हो रही फसल के बारे में आसपास के लोगों या संबंधित विभागों को कोई जानकारी थी या नहीं? इन बिंदुओं की पड़ताल जरूरी है।
वन भूमि के स्वामित्व और कब्जे की होगी जांच
पुलिस के अनुसार, संबंधित भूमि के स्वामित्व और कब्जे की जानकारी वन विभाग से मांगी जा रही है। आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने दो प्रकरण दर्ज किए हैं और मामले की जांच जारी है।
संयुक्त अभियान में निरीक्षक नारायण रावल, निरीक्षक प्रमोद कश्यप, निरीक्षक सीताराम सोलंकी, उपनिरीक्षक प्रकाश मंडलोई, उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह चौहान, उपनिरीक्षक छन्नूलाल चौहान और सहायक उपनिरीक्षक शक्तिसिंह सिकरवार सहित विभिन्न जिलों के पुलिस बल की भूमिका रही।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
- जंगल में गांजे की अवैध खेती कितने समय से चल रही थी?
- खेती करने वालों की पहचान कब तक होगी?
- संबंधित जमीन वन विभाग की है या किसी अन्य श्रेणी की, और वहां कब्जा किसका है?
- क्या आसपास के अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी ऐसी खेती की आशंका है?
- भविष्य में ऐसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी कैसे बढ़ाई जाएगी?
