किताबों से दोस्ती युवाओं को बनाती है विचारों से समृद्ध: मोक्ष यादव

बड़वानी के पीजी कॉलेज में पुस्तक चर्चा, ‘द ब्रेव’ से लेकर ‘जीत आपकी’ तक प्रेरक साहित्य पढ़ने का आह्वान

दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी

किताबें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने, सोच को व्यापक बनाने और व्यक्तित्व को निखारने का सशक्त साधन हैं। अच्छी पुस्तकों से युवावस्था में विकसित हुई दोस्ती जीवनभर मार्गदर्शन करती है। इसी विचार के साथ प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पुस्तक चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर प्रेरक, ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक साहित्य पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य के मार्गदर्शन में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने पठन अनुभव साझा किए। डॉ. वीणा सत्य ने कहा कि नियमित अध्ययन से ज्ञान, चिंतन क्षमता, भाषा और आत्मविश्वास का विकास होता है। पुस्तकें विद्यार्थियों के बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास की आधारशिला हैं।

‘द ब्रेव’ में भारतीय सैनिकों के शौर्य की गाथाएं

पुस्तक अध्ययन में रुचि रखने वाले युवा मोक्ष यादव ने विद्यार्थियों को रचना बिष्ट रावत की पुस्तक ‘द ब्रेव’ पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में 21 परमवीर चक्र विजेताओं की वीरगाथाओं के माध्यम से भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और देश के प्रति समर्पण को प्रस्तुत किया गया है।

मोक्ष यादव ने कहा कि किताबों से दोस्ती विचारों को समृद्ध करती है और जीवन को देखने का नजरिया बदलती है। उन्होंने अपने पठन अनुभव साझा करते हुए ‘नियति को चुनौती’, ‘बलिदान’, ‘सिक्स गेट्स ऑफ हेल’, ‘फोर्स बिहाइंड फोर्स’, ‘द आर्ट ऑफ वॉर’, ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ और ‘रैम्बो’ जैसी पुस्तकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों का साहित्य पढ़कर अपने ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार करने की सलाह दी।

भारतीय ज्ञान परंपरा से आधुनिक साहित्य तक

डॉ. मधुसूदन चौबे ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए वेद, पुराण, श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण जैसी रचनाओं के महत्व को बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिव खेड़ा की पुस्तक ‘जीत आपकी’ पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अंग्रेजी संस्करण ‘यू कैन विन’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी रुचि और सुविधानुसार अच्छी पुस्तकों का नियमित अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा, किताबों में झुके हुए सिर दुनिया में हमेशा ऊंचे उठे रहते हैं। यह विचार ज्ञान, अध्ययन और निरंतर सीखने के महत्व को दर्शाता है।

कार्यक्रम में हंसा धनगर, जोया खान, आरती धनगर, भोलू बामनिया और सलीना खान ने सहयोग प्रदान किया। पुस्तक चर्चा ने विद्यार्थियों को नियमित पठन की आदत विकसित करने और अपने अनुभवों को साझा करने के लिए प्रेरित किया।