बड़वानी में पेश हुई सरदार सरोवर पर जन आयोग की रिपोर्ट, पुनर्वास से लेकर पर्यावरण तक परियोजना के दावों पर सवाल

₹4,200 करोड़ से ₹75 हजार करोड़ पार पहुंची लागत, फिर भी विस्थापितों का पुनर्वास अधूरा

बड़वानी में जन आयोग की रिपोर्ट पेश, 15,946 परिवारों को लाभ से वंचित रखने का आरोप; नहरों के निर्माण, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों पर भी उठाए सवाल


दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी


सरदार सरोवर परियोजना की लागत बढ़कर 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई, लेकिन हजारों विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जन आयोग की रिपोर्ट में परियोजना के लाभ, पुनर्वास व्यवस्था और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। गुरुवार को बड़वानी के सुख विलास कॉलोनी स्थित पेंशनर भवन में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। आयोग के अनुसार, वर्ष 1983 में परियोजना की अनुमानित लागत 4,200 करोड़ रुपये थी। इसके बावजूद कच्छ और सौराष्ट्र जैसे क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के वादे अधूरे हैं और प्रभावित परिवारों की समस्याएं बनी हुई हैं।

15,946 परिवारों के पुनर्वास पर सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में 15,946 परिवारों के मकान, दुकान या जमीन अधिग्रहण की जद में आए, लेकिन वर्ष 2008 में बैकवाटर लेवल के पुनरीक्षण के बाद उन्हें डूब क्षेत्र से बाहर मान लिया गया। इससे वे पुनर्वास लाभों से वंचित रह गए। आयोग के मुताबिक, वर्ष 2023 की डूब ने पुनरीक्षित जलस्तर पर सवाल खड़े किए। कुछ परिवार आज भी टीनशेड और क्षतिग्रस्त मकानों में रहने को मजबूर हैं। तीनों राज्यों में 50 हजार से अधिक परिवारों के पुनर्वास के बावजूद हजारों परिवारों की समस्याएं बरकरार हैं।

नहरें अधूरी, पुनर्वास स्थलों पर सुविधाओं का अभाव

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में करीब 5,000 किलोमीटर नहरों का निर्माण बाकी है। कच्छ और सौराष्ट्र जैसे जरूरतमंद क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने में देरी पर सवाल उठाते हुए नहर निर्माण पूरा करने की मांग की गई है। वहीं, पुनर्वास स्थलों पर पेयजल, सड़क, जल निकासी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है।

पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों पर चिंता

रिपोर्ट में अवैध रेत खनन, औद्योगिक अपशिष्ट और शहरी गंदगी से नर्मदा के प्रदूषण पर चिंता जताई गई है। साथ ही, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों को अधिकार नहीं मिलने और पुनर्वास संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं।

स्वतंत्र समीक्षा की मांग

जल बिरादरी, डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट और हिमधारा के सहयोग से गठित तीन सदस्यीय जन आयोग ने परियोजना की स्वतंत्र आर्थिक समीक्षा, सभी पात्र विस्थापितों के संपूर्ण पुनर्वास और प्रभावित स्थलों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित नौ सिफारिशें की हैं। रिपोर्ट का विमोचन पूर्व सीएमओ मोहम्मद सादिक शेख ने किया। इस दौरान मानवाधिकार सुरक्षा संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राधेश्याम पाटीदार, सचिव विजयकुमार जैन, जिलाध्यक्ष मनोहर सिंह दरबार, मोहन पाटिल और सुरेंद्र शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।