मोगरीखेड़ा डैम: किसानों की मांग—सर्वे की निष्पक्ष जांच हो, गलत पैमाइश से जमीन न हो प्रभावित

38 किसानों की करीब 100 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आने की आशंका; कलेक्टर से गुहार—प्रस्तावित स्थान पर ही हो निर्माण, आदिवासी परिवारों की आजीविका सुरक्षित रखे प्रशासन

दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी

मोगरीखेड़ा डैम के सर्वे और जमीन की पैमाइश को लेकर प्रभावित किसानों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। संभावित डूब क्षेत्र में कृषि भूमि आने की आशंका के चलते ग्रामीण मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और आवेदन सौंपकर अपनी समस्या बताई। किसानों की प्रमुख मांग है कि सर्वे की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और गलत पैमाइश के कारण उनकी जमीन प्रभावित नहीं होने दी जाए।

ग्रामीणों के अनुसार, मोगरीखेड़ा डैम की पैमाइश से राजमहल, झरी और शिवजाऊं सहित आसपास के गांवों की जमीन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों का दावा है कि करीब 100 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आ सकती है, जिससे लगभग 38 किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। प्रभावितों में अधिकांश आदिवासी परिवार हैं, जिनकी गुजर-बसर खेती पर निर्भर है।

किसानों की तीन प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डैम के सर्वे और डूब क्षेत्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जमीन की मौके पर सही पैमाइश हो और तालाब का निर्माण प्रस्तावित स्थान पर ही किया जाए। किसानों का कहना है कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने कहा—जमीन ही आजीविका का सहारा

ग्रामीणों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हम डैम निर्माण के विरोधी नहीं हैं। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि सर्वे और पैमाइश सही तरीके से हो। आदिवासी परिवारों के पास थोड़ी-सी जमीन ही खेती और परिवार के भरण-पोषण का सहारा है। यदि गलत पैमाइश के कारण जमीन डूब क्षेत्र में चली गई, तो हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। प्रशासन मौके पर जांच कर हमारी जमीन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करे।”

किसानों ने कलेक्टर से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग की है। अब ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।