ग्रामसभा की अनुमति के बिना निर्माण शुरू करने का आरोप; आदिवासी बस्ती, पेयजल स्रोत और धार्मिक स्थल के नजदीक कचरा प्रोसेसिंग यूनिट बनाने पर विवाद, प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल
दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी
शहर के कचरे के निपटान के लिए अमलायपानी में प्रस्तावित कचरा प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण विवादों में घिर गया है। करीब 35 प्रतिशत काम पूरा होने और लगभग 30 लाख रुपये खर्च होने के बाद ग्राम पंचायत अमलायपानी की याचिका पर हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किया है। ग्रामीणों ने परियोजना के स्थल चयन और ग्रामसभा की अनुमति को लेकर आपत्ति जताई है। अब इस मामले में निर्माण प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और खर्च हुई राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🗣️ सरपंच और ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्राम पंचायत के सरपंच दीपक बाबरे के अनुसार, प्रशासन ने ग्रामसभा बुलाए बिना और उसकी सहमति लिए कचरा प्रोसेसिंग यूनिट के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में यूनिट बनाई जा रही है, वहां आदिवासी परिवार रहते हैं। ऐसे में परियोजना शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों और संभावित प्रभावों पर विचार किया जाना चाहिए था।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि परियोजना को लेकर आवेदन और विरोध किए जाने के बावजूद उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर स्थानीय आबादी की समस्याओं और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
🌿 आदिवासी बस्ती, पेयजल स्रोत और धार्मिक स्थल की निकटता
प्रस्तावित स्थल के आसपास आदिवासी बस्ती, पेयजल स्रोत और धार्मिक स्थल होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों को आशंका है कि कचरा प्रोसेसिंग यूनिट से दुर्गंध, गंदगी और पेयजल स्रोतों के प्रदूषित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसी आधार पर वे स्थल चयन पर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कचरा प्रबंधन के लिए उपयुक्त स्थान का चयन जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण, स्वास्थ्य और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

⚖️ हाईकोर्ट के स्टे के बाद निर्माण पर विराम
ग्राम पंचायत अमलायपानी की याचिका पर हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किया है। इसके बाद परियोजना की अनुमति, ग्रामसभा की भूमिका और निर्माण शुरू करने से पहले अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि ग्रामसभा की अनुमति आवश्यक थी, तो निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस प्रक्रिया को पूरा क्यों नहीं किया गया? ग्रामीणों की आपत्तियों का समय रहते समाधान क्यों नहीं निकाला गया? इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
💰 30 लाख रुपये खर्च, अब जवाबदेही का सवाल
परियोजना का करीब 35 प्रतिशत काम पूरा होने और लगभग 30 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी के बाद खर्च की गई राशि और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का विरोध और हाईकोर्ट का स्थगन आदेश परियोजना से जुड़े दस्तावेजों, अनुमति प्रक्रिया और स्थल चयन की जांच की जरूरत को सामने लाता है।

🏛️ स्वच्छता प्रभारी बोले—स्टे के कारण काम रोका
नगर पालिका के स्वच्छता प्रभारी बलदेव सिंह ठाकुर ने बताया कि अमलायपानी में नए ट्रेचिंग ग्राउंड के निर्माण के दौरान हाईकोर्ट का स्थगन आदेश होने के कारण फिलहाल काम रोक दिया गया है। उनके अनुसार, अब तक करीब 35 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
❓ शहर को कचरा प्रबंधन की जरूरत, ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान भी जरूरी
बड़वानी शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान आवश्यक है। हालांकि, इसके लिए कानूनी प्रावधानों, पर्यावरणीय सुरक्षा और स्थानीय लोगों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
