शासकीय आदर्श महाविद्यालय में व्याख्यान आयोजित, विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य के रोजगार अवसरों की दी जानकारी
दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी
बदलते दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री रोजगार पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। युवाओं को रोजगार की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए तकनीकी दक्षता, डिजिटल ज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की समझ भी विकसित करनी होगी। तकनीक का व्यावहारिक उपयोग सीखकर विद्यार्थी न केवल रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं, बल्कि स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। यह बात शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने ‘रोजगार प्राप्ति में तकनीकी कौशल और एआई की भूमिका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में कही।
💻 डिजिटल कौशल से बढ़ेगी रोजगार क्षमता
डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में कंप्यूटर ज्ञान, इंटरनेट का प्रभावी उपयोग, डिजिटल संचार, डेटा विश्लेषण और समस्या समाधान जैसे कौशल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एआई का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, बैंकिंग, विपणन और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को नई तकनीकों की बुनियादी समझ के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीखना चाहिए।

🚀 एआई का उपयोग करें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
व्याख्यान में बताया गया कि एआई आधारित उपकरणों से अध्ययन सामग्री तैयार करने, जानकारी जुटाने, करियर के विकल्प तलाशने और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीक का उपयोग करते समय तथ्यों की सत्यता, मौलिकता, डेटा सुरक्षा और नैतिक मूल्यों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
प्रो. राजाराम मुवेल ने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार तकनीकी कौशल विकसित करने तथा प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप निरंतर सीखते रहने के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अनिल पाटीदार ने किया। आयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी प्रो. राजाराम मुवेल का विशेष सहयोग रहा। महाविद्यालय का स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी जानकारी और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
