सड़क-पानी और सफाई की समस्या पर घमासान; तत्कालीन एसडीएम द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए जाने का दावा, अब दस्तावेजों की जांच से खुलेगा मामला
दैनिक ध्रुव वाणी बड़वानी
शहर की सावंतपुरम कॉलोनी में सड़क, साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर विवाद गहरा गया है। करीब 26 साल से समस्याओं से जूझ रहे रहवासियों की शिकायत के बाद नगरपालिका ने कॉलोनाइजर एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मण चौहान को तीन दिन का नोटिस जारी कर हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। दूसरी ओर, चौहान का दावा है कि कॉलोनी वर्ष 2011 में ही हैंडओवर कर दी गई थी और इसका पूर्णता प्रमाण पत्र भी उनके पास मौजूद है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कॉलोनी का हस्तांतरण पहले ही हो चुका था, तो नगरपालिका के रिकॉर्ड में इसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है और रहवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों हैं?

कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत के बाद बुधवार शाम कॉलोनीवासियों और नगरपालिका अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। सीएमओ सोनाली शर्मा के अनुसार, नगरपालिका के रिकॉर्ड में कॉलोनी का हैंडओवर दर्ज नहीं है। इसी आधार पर कॉलोनाइजर को तीन दिन में हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज, विकास कार्यों की जानकारी और विभिन्न शुल्कों की रसीदें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस की प्रतिलिपि कलेक्टर को भी भेजी गई है। तय समय में दस्तावेज नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

2011 में कॉलोनी हस्तांतरित प्रमाण पत्र का दावा
वहीं, कॉलोनाइजर लक्ष्मण चौहान ने बताया कि वर्ष 2011 में नगर पालिका में निर्वाचित परिषद के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था थी। उनके अनुसार, उस दौरान कॉलोनी में सड़क, ड्रेनेज और पानी की लाइन सहित विकास कार्य पूरे कर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी। चौहान का दावा है कि तत्कालीन एसडीएम मीना मिश्रा ने पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया था, जो उनके पास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि वे नगरपालिका को जवाब के साथ संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

चौहान ने आरोप लगाया कि कॉलोनी हस्तांतरित होने के बाद भी सड़कें नहीं बनाई गईं और सीवर लाइन डालने के दौरान सड़कें खोद दी गईं। उनका कहना है कि नगरपालिका को अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय रहवासियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
रहवासियों की बात
रहवासियों के अनुसार, वर्ष 2001 में विकसित सावंतपुरम कॉलोनी में आज भी सड़क, नियमित सफाई और खुले चैंबर जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। पेयजल व्यवस्था को लेकर भी लोगों की परेशानी बढ़ी है। उनका कहना है कि पहले 100 रुपये प्रतिमाह में एक दिन छोड़कर पानी मिलता था, जबकि अब 150 रुपये देने के बावजूद दो दिन के अंतराल से आपूर्ति हो रही है। पानी संग्रहित करने की व्यवस्था नहीं होने पर कुछ परिवारों को 250 से 300 रुपये खर्च कर टैंकर मंगवाना पड़ता है।
वर्षों बाद नोटिस जारी, तो निराकरण कब ?
कॉलोनीवासी जमुना उपाध्याय ने बताया कि जनसुनवाई में शिकायत देने के बाद महिलाएं नगरपालिका पहुंचीं और सीएमओ से चर्चा की। रहवासियों ने सवाल उठाया कि यदि कॉलोनी का हैंडओवर नहीं हुआ था, तो इतने वर्षों तक संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि पहले ही मामले में गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद समस्याओं का समाधान हो सकता था। रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे दोबारा कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी उठाई गई है।
तीन दिन के नोटिस पर टिकी निगाह
फिलहाल नगरपालिका के रिकॉर्ड और कॉलोनाइजर के दावे में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर निकाय का कहना है कि कॉलोनी का हैंडओवर दर्ज नहीं है, वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण चौहान वर्ष 2011 में हस्तांतरण और पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने का दावा कर रहे हैं। अब तीन दिन के नोटिस के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। लेकिन रहवासियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि हैंडओवर का विवाद कब सुलझेगा और सड़क, सफाई व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं आखिर कब मिलेंगी?
