जिले में चिह्नित 17 ब्लैक स्पॉट पर रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर्स, उचित प्रकाश व्यवस्था और साइन बोर्ड लगाने के दिए निर्देश

🔴 कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित

🔵 नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कि जाये कार्यवाही

ध्रुव वाणी न्यूज बड़वानी

कलेक्टर जयति सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागृह  में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिले के 17 ब्लैक स्पॉट पर सुधारात्मक कार्य करने, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने और जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर, जिला परिवहन अधिकारी राकेश भूरिया, यातायात प्रभारी विनोद बघेल सहित एनएचएआई, एमपीआरडीसी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में जिला परिवहन अधिकारी राकेश भूरिया ने बताया कि वर्ष 2025 जिले में कुल 17 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जिसमे रोड एजेंसी एनएचएआई के 12, एनएच, पीडब्ल्यूडी के 1 और एमपीआरडीसी के 4 ब्लैक स्पॉट शामिल हैं। कलेक्टर ने इन स्थानों पर तत्काल निम्नलिखित कार्य करने के निर्देश दिए।

शॉर्ट टर्म कार्य – इन स्थानों पर रंबल स्ट्रिप लगाना, उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना और खराब ब्लिंकर्स की मरम्मत करना। सीएमओ ठीकरी को निर्देश दिए गए कि जिले के एंट्री पॉइंट पर एक माह के भीतर नए और स्पष्ट साइन बोर्ड लगाए जाएं।

लॉन्ग टर्म कार्य – दुर्घटना संभावित मोड़ों का चौड़ीकरण ( Curve Widening ) करने हेतु उच्च स्तर पर समन्वय कर कार्य पूर्ण कराएं।

कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश

बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर कलेक्टर जयति सिंह ने निर्देशित किया कि प्रत्येक विभाग अपने मौलिक दायित्वों का पालन करे। सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटें अत्यंत खेदजनक हैं। सभी विभाग सुनिश्चित करें कि मॉनिटरिंग और कम्प्लायंस समय पर हो ताकि किए गए कार्यों का असर जमीन पर दिखे।

◼️ एनएचएआई को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र में ट्रेन एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग और फंक्शनल टॉयलेट की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

◼️ आरटीओ को ओवरलोडिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए गए।

◼️टोल नाकों के सभी गेट चालू होने चाहिए।

◼️ सड़कों पर बनाए जाने वाले स्पीड ब्रेकर साइंटिफिक डिजाइन के होने चाहिए ताकि वे स्वयं दुर्घटना का कारण न बनें।

◼️ पुलिस विभाग स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए। इस कार्य में ट्रैफिक एनजीओ की भी मदद ली जाए।

◼️ राहवीर योजना के माध्यम से घायलों की मदद सुनिश्चित की जाए।