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Women Entrepreneurship: नवोदित महिला उद्यमी असफलता से कतई न डरें: वीसी

Women Entrepreneurship

  • WEDP से लाभान्वित होंगी नवोदित महिला उद्यमी: प्रो. रघुवीर सिंह
  • महिला उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण जुड़वां बहनों की मानिंद: अनुपमा
  • महिलाएं देश की प्रगति का आधार, नारी सम्मान बेहद जरुरी: प्रो. द्विवेदी
  • कृषि क्षेत्र में महिला उद्यमिता के अनेक नए अवसर: डॉ. नटराजन
  • बाजार सर्वे की प्रश्नावली के वक्त रखें छोटी-छोटी बातों का ध्यान: डॉ. अरोड़ा
  • व्यक्तिगत और संगठनात्मक स्तर पर लक्ष्य तय करना महत्वपूर्ण: अल्पी जैन
  • डॉ. मेघा शर्मा बोलीं, टैक्सेशन औद्योगिक विकास की मानिंद

दिल्ली। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने कहा, WEDP में हमने Women Entrepreneurship (महिला उद्यमिता) की जरूरत के सभी पहलुओं को कवर किया है, जिनकी महिला उद्यमियों को जरूरत है। यह प्रशिक्षण दो साल के एमबीए प्रोग्राम के सिलेबस से कमतर नहीं है।

इस WEDP से नवोदित महिला उद्यमी (Women Entrepreneurship) बहुत लाभान्वित होंगी। उन्होंने कहा, महिलाएं इन दिनों सशक्त हो रही हैं इसीलिए इस डब्ल्यूईडीपी के जरिए वे कुछ बेहतर कर सकती हैं। खुद को फिर से सभी बाधाओं को दूर कर सकती हैं।

हमें असफलता के डर के बिना कड़ी मेहनत करने की कोशिश करनी चाहिए। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज-एफओईसीएस की ओर से ऑनलाइन आयोजित Women Entrepreneurship Development Program- WEDP के समापन मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

मुरादाबाद की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनुपमा शांडिल्य ने बतौर मुख्य कहा, महिला उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण जुड़वां बहनों की तरह हैं, जो एक रूढ़िवादी दुनिया की बाधाओं को तोड़कर देश की तस्वीर बदल सकती हैं।

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इस गतिशील दुनिया में महिला उद्यमी (Women Entrepreneurship) सतत आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के वैश्विक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा हैं। महिलाओं के लिए अपनी ताकत साबित करना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन रूढ़िबद्ध समाज में बाधाओं के खिलाफ लड़ते हुए, अग्रणी महिलाओं ने कई अलग-अलग भूमिकाओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने जयशंकर प्रसाद की कामायनी का उदाहरण देते हुए कहा, किसी भी सभ्य समाज की स्थिति स्त्रियों की दशा देखकर ज्ञात की जा सकती है। महिला उद्यमिता किसी भी देश के आर्थिक विकास एवं स्थिरता का महत्वपूर्ण साधन है, क्योंकि महिलाएं मानव पूंजी की पोषिका और परिवार की पालनहार होती हैं।

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महिलाएं यूँ तो स्वत: ही कौशल संपन्न होती हैं। बस आवश्यकता होती है, थोड़ा उनमें आत्मविश्वास जगाने की। Delhi-NCR से निकटता एवं रामगंगा के तराई का क्षेत्र होने जैसी भौगोलिक अनुकूलताओं के कारण यहां नए स्टार्टअप और उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं।

यह जमीनी हकीकत ही है कि वर्तमान में इस कोरोना महामारी के कारण अनेक नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में आयोजित महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम महिलाओं के विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा ।

विक्टोरिया ट्रेनिंग फाउंडेशन, हैदराबाद के निदेशक डॉ. एपी नटराजन ने कहा, नवोदित उद्यमियों के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्यमियों के गुणों और मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा, उद्यमियों को

“कैसे चीजें हुई” या “अज्ञात की जिज्ञासा” की जानकारी होनी चाहिए। इस महामारी के युग में कृषि क्षेत्र में विविधीकरण, जैविक खेती, खाद्य संरक्षण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग आदि में महिला उद्यमियों के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। फूलों की खेती भी एक बहुत बड़ा बाजार है,

भारत में विभिन्न हिस्सों में फूलों की खेती के लिए अनुकूल पर्यावरणीय स्थिति है, वर्तमान में भारत में फूलों की खेती में केवल 0.01 प्रतिशत वैश्विक बाजार हिस्सेदारी है। पौधों के बीज, कीटनाशक, जैविक उर्वरक आदि का उत्पादन होता है।

यंग इंडिया, दिल्ली की ओनर एवं प्रमुख करियर काउंसलर सुश्री अल्पी जैन ने लीडरशिप मोड्स एंड स्टाइल्स पर बोलते हुए कहा, व्यक्तिगत और संगठनात्मक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने ओपरा विनफ्रे जैसी सफल महिला उद्यमियों (Women Entrepreneurship)

के उदाहरण देते हुए कहा, एक अच्छे नेता में केंद्रित रहना, रणनीतिक तरीके से चीजों की योजना बनाना, स्थितियों को अच्छी तरह से समझना आदि गुण आवश्यक हैं। FOECS, TMU की फैकल्टी डॉ. मेघा शर्मा ने टैक्सेशन-वेरियस टैक्सेज एप्लीकेबल पर बोलते हुए कहा, टैक्सेशन औद्योगिक विकास की रीढ़ है।

उन्होंने MSME के वर्गीकरण, विभिन्न कर श्रेणियों, जीएसटी के विवरण और एमएसएमई पर इसकी एप्लीकेबिलिटी, एमनेस्टी योजना और इससे संबंधित नई नीतियों पर चर्चा की। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों जैसे संपत्ति कर, उपहार कर आदि पर जोर दिया। उन्होंने MSME को मिलने वाले GST के लाभों के बारे में भी बताया।

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TMU के ज्वाइंट रजिस्ट्रार-एचआर डॉ. पीएन अरोड़ा ने बाजार सर्वेक्षण के लिए ब्रीफिंग और योजना: प्रश्नावली तैयारी पर बोलते हुए कहा, प्रश्नावली को तैयार करते समय छोटी-छोटी गलतियों से कुछ लोग अनजान रहते हैं, यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो बाजार सर्वेक्षण में समस्या आती है।

उन्होंने प्रश्नावली की तैयारी से संबंधित प्रत्येक विषय का विस्तार से वर्णन किया- प्रश्नावली का उपयोग कब करना है, प्रश्नावली का उपयोग क्यों करना है, एक अच्छी प्रश्नावली के प्रमुख मानदंड हैं, जिनका हमें ध्यान रखने की दरकार है।

MIT, मुरादबाद की फैकल्टी डॉ. सुगंधा ने स्टार्ट अप के लिए मानव संसाधन प्रबंधन विषय पर सार्थक और ज्ञानवर्धक जानकारी दी, जो मानव संसाधन प्रबंधन और उसकी नीतियों से संबंधित चर्चा के संदर्भ में किसी भी संगठन के लिए अभिन्न अंग है।

उन्होंने HRM की भूमिका, मुआवजा, प्रतिधारण, रोजगार को प्रभावित करने वाले कानूनों से निपटने आदि सहित विभिन्न बिंदुओं विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बहुसांस्कृतिक वातावरण, जीवन चक्र को रोजगार और कई अन्य विषयों का भी उल्लेख किया।

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WEDP के समापन पर कन्वीनर डॉ. गुलिस्ता खान ने चार सप्ताह चले WEDP के प्रशिक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। अंत में नेहा आनंद ने वोट ऑफ़ थैंक्स दिया।WEDP में डॉ. पंकज कुमार गोस्वामी, डॉ. गरिमा गोस्वामी, श्री प्रदीप कुमार वर्मा, डॉ. अशेंद्र कुमार सक्सेना, डॉ. संदीप वर्मा, मिस शिखा गंभीर, श्री अजय चक्रवर्ती, श्री अंकित शर्मा आदि का उल्लेखनीय सहयोग रहा।