नेपाल में छात्र संगठनों ने चीनी राजदूत ‘होउ यांकी’ का किया विरोध, कहा- ‘चाइना वापस जाओ’

 

[adsforwp id=”15966″]

नेपाल की राजनीति में चीन के बढ़ते दखल का विरोध ललितपुर के छात्र संगठनों ने शुरू कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि चीन के इशारे पर सरकार चल रही है। घरेलू मामलों में दखल को लेकर छात्र संगठनों ने सड़क पर उतर कर चीनी राजदूत होउ यांकी का विरोध शुरू कर दिया है.

और नेपाल विद्यार्थी संघ नेतृत्व में छात्र हाथों में पोस्टर लेकर ‘चाइना वापस जाओ’ का नारा लगाते हुए विरोध कर रहे हैं। रूपनदेही जिले के राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि यह पहली बार नहीं है.

कि चीनी राजदूत ने संकट के समय नेपाल के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया है। करीब डेढ़ महीने पहले जब एनसीपी की अंदरूनी कलह शीर्ष पर पहुंच गई थी तब उन्होंने राष्ट्रपति भंडारी, प्रधानमंत्री ओली और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड एवं माधव नेपाल से अलग-अलग बैठक कर मामले को हल किया था।

छात्र संगठन की ओर से चीनी राजदूत के दखल को लेकर छात्र विरोध कर रहे हैं। छात्र नेता विष्णु पोरेल ने कहा कि चीनी राजूदत नेपाल की राजनीति में ज्यादा दखल दे रही हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्र संगठन शांतिपूर्वक अपना विरोध जारी रखेगा।जल्दी ही नेपाल के अन्य हिस्सों में विरोध होगा।

यह भी पढ़ें: मेरठ से सामने आईं दहशत की तस्वीरें, पुलिस अधिकारियों में मचा हड़कंप, मौके पर भारी फोर्स

नेपाल के सोशल मीडिया में तस्वीरें वायरल

नेपाल के सोशल मीडिया तस्वीरें वायरल हो रही हैं, उनमें दिख रहे पोस्टरों पर ‘गो बैक चाइना’ और ‘नो इन्टर्फिरन्स’ जैसे नारे लिखे गए थे। नेपाल की मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के स्टूडेंट विंग के सदस्यों ने कहा, ‘चीन की राजदूत को दूतावास में रहना चाहिए,

हमारे नेताओं के घरों में नहीं। हाउ यांकी चुप रहें।’ यांकी इन दिनों काठमांडू में काफी सक्रिय हैं और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके ओली के लिए कवच बनने का प्रयास कर रही हैं।

रविवार को चीनी राजदूत ने वरिष्ठ एनसीपी नेता माधव कुमार नेपाल से मुलाकात की थी और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की थी। उन्होंने उसी दिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की थी।

नेपाल और खनाल के करीबियों ने बताया कि इन दोनों नेताओं ने देश की नवीनतम राजनीतिक स्थिति पर चीनी राजदूत के साथ चर्चा की। उन्होंने उसका ब्योरा नहीं दिया।