राष्ट्रपति व मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट को सामाजिक कार्यकर्ता सोमेश्वर पाटीदार ने लिखा पत्र

 ◆ सरकार की लापरवाही से देशभर में अव्यवस्थाओं के कारण लोगों की मौतें होने पर संज्ञान लेकर संवैधानिक कदम उठाइये*

◆ सुप्रीम कोर्ट ने आमजनों की पीड़ा, चीखें व जलती चिताओं पर चिंता की, सरकार लापरवाह कैसे बनी रही*

◆ राष्ट्र व मानव हित में नैतिक जिम्मेदारी का अहसास कर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दीजिए मोदी जी- सोमेश्वर पाटीदार

Corona virus

कुक्षी। विश्वव्यापी कोविड-19 कोरोना Corona महामारी से एक वर्ष से भी अधिक समय से हमारे देश का जनमानस संघर्ष करते हुए परेशान है। भारत सरकार द्वारा पिछले वर्ष से विभिन्न प्रकार के बचाव हेतु नियमों व दिशानिर्देश जारी कर प्रशासन के माध्यम से आमजनों को शादी, शवयात्रा, व्यापार व अन्य सभी कार्य व सावधानियां रखने के लिए पालन करवाने के प्रयास किये गए है।

पिछले वर्ष भी लम्बे समय लॉकडाउन व जनता कर्फ्यू करवाया गया था। शासन-प्रशासन के नियमों का पालन देश की जनता ने सम्मानपूर्वक किया भी और आज भी कर रहे है। उक्त बात सामाजिक कार्यकर्ता सोमेश्वर पाटीदार ने भारत के माननीय राष्ट्रपति व माननीय मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली को प्रेषित पत्र में लिखी है।

पाटीदार ने पत्र में लिखा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना Corona महामारी को गम्भीरता से न लेकर लापरवाही से देशभर में अव्यवस्थओं के कारण लोगों की मौतें होने पर राष्ट्रपति उन्हें नैतिक जिम्मेदारी का अहसास करवाकर संवैधानिक कार्यवाही करें व भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश संज्ञान लेकर संवैधानिक कार्यवाही करें।

पाटीदार ने बताया सरकार द्वारा वैक्सीन टीकाकरण कार्य भी जारी है। हालांकि, इसमें भी अब तक पर्याप्त व्यवस्था नही हो पाई है। सरकार वैक्सीन (टिका) लगवाने के लिए विज्ञापन जारी कर जनजागृति कर रही, किंतु टीकाकरण केंद्र से खाली लौटना पड़ता है। क्योंकि आज दिनांक तक पर्याप्त व्यवस्था नही दिखाई दे रही है।

आज जो हालात एक वर्ष बाद कोरोना Corona की दूसरी लहर से देख रहे वह बहुत ही पीड़ादायक है। यह स्थितियां हो गई है कि, अस्पतालों में बेड नही, ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है। दवाइयों के लिए भी लोग तरस रहे और कालाबाजारी करते हुए कई गुना दामों में ब्लैक में बिक रही है। बड़े ही दुख के साथ लिख रहा हूं कि,आज की हालत के सबसे ज्यादा जिम्मेदार हमारे अपने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ही है।

उन्होंने कहा कि, कोरोना Corona को लेकर सरकार का दोहरा मापदंड दिखाई दिया है ? सरकार ने आम जनमानस के लिए तो सभी नियमों को सख्ती से पालन भी करवाया, किंतु दूसरी और इन्हीं नियम बनाने वालों के द्वारा ही बड़े-बड़े लाखों की जनसंख्या एकत्रित कर राजनीतिक कार्यक्रम करवाये गए।

जब देश इस भयानक बीमारी से लड़ रहा था और कई राज्यों में लॉकडाउन, कोरोना कर्फ्यू चल रहा था, तब श्री नरेंद्र मोदी स्वयं चुनावी सभाओं में लाखों की संख्या में जमा लोगों को सम्बोधित कर वोट मांग रहे थे। और तभी अस्पतालों के बाहर आम जनमानस बेड, ऑक्सीजन, दवा मांग रहा था। आज भी देश में महामारी व अव्यवस्थओं के हालात है। क्या देश की अवाम की जान की कीमत से ज्यादा जरूरी चुनाव करवाना था? चुनाव करवाने के अतिरिक्त उसका समय बढ़ाने का कोई प्रावधान नही है क्या ?

भारत सरकार ने लाखों की संख्या में चल रहे किसान आंदोलन को भी समाधान कर समाप्त नही करवाया है। क्या यहां कोरोना Corona के आने की संभावना नही थी ? प्रधानमंत्री जी यदि चुनावी तैयारियों में समय न देकर एक वर्ष से कोरोना महामारी से लड़ने के लिए पूरा समय देते तो आज के हालात सुधरे हुए हो सकते थे। आज किसी ने मॉं-पिता तो किसी ने भाई, बहन, बेटे खो दिए है और यह अपूरणीय क्षतियां आज भी जारी है।

आम नागरिक हर तरह की मार झेल रहा है। इन तमाम तरह की लापरवाही व गैर-जिम्मेदार घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री पद से नरेंद्र मोदी से इस्तीफा दे, गरिमामयी प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी अब न बने रहे ऐसी मांग हेतु मजबूर कर दिया है। दिनांक: 28 अप्रैल 2021 बुधवार को इस्तीफा देने सम्बंधित पत्र मेरे द्वारा प्रधानमंत्री जी को लिखा जा चुका है।

मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में उल्लेखित है कि, माननीय महोदय देश की विभिन्न न्यायालयों ने संज्ञान में लेकर अव्यवस्थओं की वजह से कईं मौतें होने पर सख्ती से सरकारों को आदेशित किया। आप माननीय (सुप्रीम कोर्ट) ने भी इस कोरोना Corona महामारी से पीड़ित आमजनों की चीखें व जलती चिताओं पर चिंता कर स्वयं अव्यस्थाओं सहित उक्त मामले को संज्ञान में लेकर सरकार को आईना दिखाया।

निश्चित ही आपने आमजनों की पीड़ा देख आवश्यक कदम उठाए है। किंतु देश की जनता हेतु आपातकाल जैसी स्थिति में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिनकी थी, वह भारत सरकार लापरवाही करती रही व बड़े राजनीतिक व चुनावी आयोजन कर लाखो की जनसंख्या एकत्रित कर बीमारी कम तो नही, पर बढ़ाने का काम किया। हम सभी देशवासियों को आपात स्थिति में सरकार के साथ होना चाहिए और है भी।

परन्तु सरकार में बैठे गरिमामयी प्रधानमंत्री पद पर श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की भारत सरकार ही ऐसी लापरवाही करें तो मानवता के लिए इस्तीफा मांगने व आप से भी उक्त मामले में राष्ट्रहित, मानवहित के लिए संवैधानिक कदम उठाने हेतु पत्र प्रेषित करने हेतु मजबूर होना पड़ा।

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पत्र में लिखा गया है कि, माननीय आप स्वयं संज्ञान लेकर व विनम्रतापूर्वक प्रेषित पत्र पर संज्ञान लेकर उचित व ठोस कार्यवाही कीजिये। यह भी लिखा है कि, कठोरतापूर्वक संवैधानिक कार्यवाही कर लापरवाही, अव्यवस्थओं से हुई मौतो के जिम्मेदारों पर व प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनी रहें, इस ओर उचित कदम उठायें।