सांसद स्वर्गीय चौहान का अधूरा सपना, 38 करोड़ की सतसोई तालाब‌ योजना

 

Pond

०- सनावद से दिनेश पाटनी
खंडवा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने भीकनगांव तहसील में 38 करोड़ की लागत से जिस सतसोई तालाब (Pond) योजना का भूमिपूजन 13 जुलाई 2018 को किया था।जो विगत 3 सालों से अनियमितता और धीमी गति से निर्माणाधीन होकर क्षेत्र के किसानो को इस वर्ष भी योजना का फायदा नहीं दे पाऐगी।

जबकि इस योजना को लेकर सां‌सद चौहान का सपना था कि नदी पर बनने तालाब (Pond) में सालभर पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। जिससे क्षेत्र के 8-10 ग्रामों के किसान रबी की फसल भी ले सकेंगे तथा भू-जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में पेयजल समस्या भी समाप्त हो सकेगी।

विदित है,ग्राम पछाया व बोरगांव के बीच सतसोई नदी पर 10 करोड़ 75 लाख रुपए से तालाब (Pond) निर्माणाधीन है। सतसोई तालाब योजना में बोरगांव, पछाया, दौड़वा, सगड़ियाव, जिरावट व दशोरा तक नहर का बनना शामिल है। इस योजना निर्माण से 424 किसानों की करीब 1070 हैक्टेयर भूमि सिंचित होना प्रस्तावित है ।

तालाब योजना 2020 तक पूरी होना चाहिए थी, लेकिन कोरोना की वजह से इसके निर्माण का लक्ष्य मई 2021 तय किया जाना बताया जाता है।बावजूद मौजूदा निर्माण की गति और स्थिति बताती है कि अगले साल तक भी योजना का निर्माण संभव नहीं है।

तालाब की पाल बनाने खोदी पहाड़ी

निर्माण की शुरुआत में ही तालाब की पाल बनाने के लिए पहाड़ी खोद मुरुम निकालने और पाल के नीचे नदी से रेत उत्खनन कर उसे बेचने की अनियमितता सामने आई। नदी के आसपास राजस्व और वन विभाग की भूमि होने से तहसील स्तर पर इसकी शिकायत होने से पंचनामा बनाया गया।

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इस पर निर्माण एजेंसी के कर्मचारीयो ने संबंधित विभाग की अनुमति से तालाब की पाल के लिए मुरुम व रेत उत्खनन करना बताया। लेकिन अनुमति के दस्तावेज नहीं बता पाए। लेकिन शिकायत के बाद रेत खोदने से हुए गड्ढाें को जेसीबी से बंद कर दिया।

धीमी गति और अनियमितताओं से होता निर्माण कार्य

सतसोई तालाब

मौजूदा स्थिति में नदी का पानी रोकने के लिए बड़ी पाल तो बना दी‌‌ गई ,लेकिन उसके उसके पेचवर्क धीमी गति से हो रहा है। वही मानसून की आहट हो चुकी है,

बावजूद अभी तक खुदे तालाब मैं हजारों डंपर मलमा मौजूद हैं। जो बारिश के दौरान खुले तालाब में ही समा जाने से परिक्षेत्र की मानक गहराई नहीं रहने से आशंकित क्षेत्र के किसान आगे खेतों में सिंचाई मैं पानी की कमी को लेकर चिंतित है।

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इस बारे निर्माण एजेंसी द्वारा बारिश के बाद नहर निर्माण के स्ट्रक्चर पैच वर्क कार्य में मलमा और पत्थर के उपयोग तथा खेतों खेतों के रास्ते में मलमा डालकर कच्चे रोड निर्माण की बात कही जा रही है।

फिलहाल निर्माणाधीन स्टॉप डेम कार्य दौरान क्षेत्र के किसानों द्वारा निविदा अनुसार निर्धारित मापदंडानुसार कार्य नहीं होने की बात कही जा रही है।

जिसमें स्टॉप डेम निर्माण में तालाब की नदी से निकली मिट्टी युक्त रेत का उपयोग तथा ड्राइंग- डिजाइन मुताबिक जाल आदि नहीं होने जैसी अनेक अनियमितताएं मौजूद है।