मध्यप्रदेश: उप-चुनाव में शिवराज नही,‘सिंधिया’ होंगे बड़ा चेहरा

चारों तरफ एक ही सवाल घूम रहा है कि आखिर सिंधिया के प्रभाव वाली ग्वालियर-चम्बल संभाग की 16 सीटों पर चुनाव किसके दम पर लड़ा जाएगा, बीजेपी या महाराज,इसी बीच सिंधिया समर्थक और शिवपुरी जिले की करेरा सीट से विधायक रहे जसवंत जाटव ने उपचुनाव से पहले बड़ा बयान देकर राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

जाटव का कहना है कि प्रदेश में होने वाले उपचुनाव बीजेपी  के बैनर तले ही लड़े जाएंगे, लेकिन उपचुनाव में पार्टी का चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे।

दरअसल, जाटव मुख्यमंत्री शिवराज से मिलने पहुंचे थे और इसी दौरान उन्होंने मीडिया से चर्चा करते कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने ग्वालियर-चंबल की 34 में से 27 सीटों पर विजय हासिल की थी। तब भाजपा और शिवराज सिंह चौहान के टक्कर में इस संभाग में अगर कोई था तो वे सिंधिया थे।

इस बार भाजपा के साथ सिंधिया बड़ा चेहरा होंगे। जनता उनके नाम पर वोट देती है। इस बार भी देगी।
जाटव इतने पर ही नही रुके उन्होंने आगे कहा कि पिछले चुनाव में तो सिंधिया अकेले थे,

इस बार सिंधिया और शिवराज सिंह एक ही मंच पर होंगे। सिंधिया चंबल-ग्वालियर क्षेत्र की जनता के चहेते हैं। वही केंद्र में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर जाटव ने कहा कि उन्हें बिलकुल केंद्र में मंत्री बनाना चाहिए। मुझे भी लग रहा है क्योंकि उनका कद और हैसियत ही ऐसी है कि केंद्र में जगह मिलेगी।

जाटव इतने पर ही नही रुके उन्होंने आगे कहा कि पिछले चुनाव में तो सिंधिया अकेले थे, इस बार सिंधिया और शिवराज सिंह एक ही मंच पर होंगे। सिंधिया चंबल-ग्वालियर क्षेत्र की जनता के चहेते हैं। वही केंद्र में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर जाटव ने कहा कि उन्हें बिलकुल केंद्र में मंत्री बनाना चाहिए। मुझे भी लग रहा है क्योंकि उनका कद और हैसियत ही ऐसी है कि केंद्र में जगह मिलेगी।

कांग्रेस बोली-स्थिति स्पष्ट करे भाजपा

कांग्रेस नेता व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उपचुनाव में उनका चेहरा कौन होगा। जनादेश के अपमान करने वाले इन लोगों की न रीति है और न नीति। जनता अब इसका जवाब देगी।

ग्वालियर चंबल की 16 सीटें हैं महत्वपूर्ण

दरअसल,इस बार चुनाव 24 सीटों पर होना है लेकिन इसमें ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों का बड़ा रोल है,22 विधायक जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में गए हैं वो सभी सिंधिया समर्थक हैं लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल सिंधिया का गढ़ है,

इसलिए कांग्रेस का यहाँ मुकाबला भाजपा के साथ सिंधिया से भी है। ये भी जग जाहिर है कि ग्वालियर चंबल में कांग्रेस नहीं सिंधिया कांग्रेस का दबदबा रहा है,2018 का मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव सिंधिया के चेहरे की ताकत और प्रभाव का बड़ा उदाहरण है जिसने कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया।

अब समझा जा सकता है कि जब प्रदेश की जनता ने सिंधिया को नेता मानते हुए कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया तो फिर ग्वालियर चंबल अंचल तो सिंधिया का घर और गढ़ है,ऐसे में देखने वाली बात ये होगी “महाराज” का चेहरा और “बीजेपी” का बैनर कांग्रेस को परास्त कर पायेगी या नही।