चुनाव 2020: जानिए- उन राज्यों की कहानी जहां छोटा भाई होते होते बीजेपी बड़ा भाई बन गई

नई-दिल्ली. आईपीएल की तरह ही बिहार की लीग का भी आज फाइनल खेला जा रहा है. 243 विधानसभा सीटों पर गिनती जारी है. दोपहर 12.21 बजे के रुझानों के मुताबिक एनडीए बहुमत का आंकड़ा पार चुका है। बीजेपी गड़बंधन एनडीए के खाते में 125 सीटें जाती नजर आ रही हैं।

वहीं महागठबंधन 102 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. चिराग पासवान की पार्टी एल.जे.पी. भी 5 सीटों पर आगे चल रही है, 11 पर निर्दलीय आगे हैं. बिहार में बहुमत का आंकड़ा 122 है.

छोटा भाई होते होते बीजेपी बड़ा भाई बन गई

बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है. एनडीए में पार्टी के हिसाब से सीटों की बात करें तो बीजेपी 72, जेडीयू 46, वीआईपी सात सीटों पर आगे चल रही है. वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा.

रुझानों के मुताबिक बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है. यूपीए की बात करें तो आरजेडी 62, कांग्रेस 21 और लेफ्ट 19 सीटों पर आगे चल रहा है, बिहार में जेडीयू और बीजेपी के बीच बड़ा भाई और छोटे भाई होने को लेकर बड़ी लंबी खींचतान चलती रही है.

यह खींचतान सीटों के बंटवारे में भी आड़े आती रही हैं. इस चुनाव में नतीजों से पहले बीजेपी की हालत छोटे भाई जैसी थी. लेकिन अब आंकड़े जो बता रहे हैं उस हिसाब से बीजेपी ने बिहार में स्पष्ट कर दिया है वहीं बड़ा भाई है.

महाराष्ट्र में भी बीजेपी शिवसेना की बड़ी भाई साबित हुई बीजेपी

बिहार सिर्फ एक उदाहरण नहीं है जहां बीजेपी छोटा भाई होते होते बड़ा भाई बन गई. बिहार से पहले बीजेपी महाराष्ट्र में भी ऐसा ही कर चुकी है. बीजेपी और शिवसेना के बीच वार पलटवार सभी को याद है. 2019 के महाराष्ट्र चुनाव में शिवसेना बीजेपी से अलग लड़ी.

अकेले मैदान में उतरी बीजेपी के खाते 105 सीटें आयीं, जबकि शिवसेना को इसका नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें सिर्फ 56 सीटें ही मिलीं. शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली.

बिहार में लगातार चल रहा आगे पीछे का खेल?

बिहार के नतीजों को देखकर चुनावी एक्सपर्ट भी हैरान हैं. शुरुआती रुझान में जब पोस्टल बैलट खुल रहे थे तब महागठबंधन को बढ़त दिख रही थी. उस वक्त कहा जा रहा था कि अगर अभी यह हाल है तो आगे जाकर यह नंबर बीजेपी और जेडीयू के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है.

गिनती के शुरुआती एक घंटे में महागठबंधन ने बढ़त बना कर रखी थी. एनडीए ने जब 100 का आंकड़ा भी पार नहीं किया था उस वक्त महागठबंधन को बहुमत मिल चुका था. लेकिन धीरे धीरे जैसे ईवीएम खुलने शुरू हुए तब एनडीए का पड़ला भारी होना शुरू हो गया.

एनडीए के माथे पर अभी भी चिंता क्यों?

रुझानों में बढ़ते के बाद भी एनडीए के खेमे में पूरी तरह खुशी नजर नहीं आ रही है. इसके पीछे का कारण बिहार की वो 70 सीटें जिन पर जीत हार का अंतर बेहद कम है. इनमें से भी 40 से ज्याजा सीटें हैं जहां एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवार के बीच वोटों का अंतर हजार से भी कम है.

इसके साथ ही अभी लगभग 50 लाख वोटों की ही गिनती हुई है, जबकि बिहार में इस बार करीब चार करोड़ वोट पड़े हैं. इसलिए एक्सपर्ट का भी कहना है कि रुझानों को देखकर हमें किसी परिणाम पर नहीं पहुंचना चाहिए. यही एनडीए खेमे के लिए भी चिंता का सबब बना हुआ है.

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