दमोह उपचुनावः बीजेपी-कांग्रेस की सीधी भिड़ंत में जयंत मलैया पर टिकी निगाहें

 

हाइलाइट्स:

  • दमोह विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को वोटिंग
  • बीजेपी से राहुल लोधी और कांग्रेस से अजय टंडन हैं उम्मीदवार
  • पूर्व मंत्री जयंत मलैया की नाराजगी हो सकती है बड़ा फैक्टर
  • मलैया को मनाने में लगी बीजेपी, कांग्रेस भी डाल रही डोरे

दमोह
मध्य प्रदेश में दमोह विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की सेनाएं सज गई हैं। दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और प्रचार अभियान भी शुरू हो चुका है। इसके बीच पूर्व मंत्री जयंत मलैया को लेकर अब भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। बीजेपी का टिकट नहीं मिलने से नाराज मलैया का रुख क्या होगा, उपचुनाव का नतीजा काफी हद तक इसी से तय हो सकता है।

उपचुनाव के लिये बीजेपी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को अपना उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने अजय टंडन को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस के उम्मीदवार अजय टंडन अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं। बीजेपी प्रत्याशी 30 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में औपचारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। हालांकि, जानकारी के मुताबिक लोधी ने शुभ मुहूर्त को देखते हुए बृहस्पतिवार को ही अपना नामांकन पत्र जमा करा दिया है।

पिछले साल अक्टूबर महीने में राहुल लोधी कांग्रेस पार्टी और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे। दमोह में इसके चलते ही उपचुनाव हो रहा है। यहां 17 अप्रैल को वोटिंग और दो मई को मतगणना होगी।

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दमोह विधानसभा का चुनाव दिलचस्प होगा क्योंकि कांग्रेस के टंडन इससे पहले दो बार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के खिलाफ यहां से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। मलैया दमोह सीट से 1990 से 2013 तक लगातार छह बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राहुल लोधी से मात्र 798 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। अब उपचुनाव में लोधी, मलैया की जगह बीजेपी के उम्मीदवार हैं।

मलैया की नाराजगी को देखते हुए बीजेपी उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश कर रही है। शुक्रवार को परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत उनसे मिलने मलैया निवास पहुंचे और दोनों के बीच लंबी मंत्रणा हुई। इधर, कांग्रेस भी उन पर डोरे डाल रही है। कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं ने कहा है कि दमोह में बीजेपी के बड़े नेता उनके संपर्क में हैं। वोटिंग से पहले दोनों ही पार्टियां हर राजनीतिक दांवपेंच आजमा रही हैं।

में शामिल हो गए थे जबकि तीन विधायकों का निधन हो गया था। इसकी वजह से विधानसभा की कुल 28 सीटों पर पिछले साल उपचुनाव कराए गए थे। कांग्रेस छोड़ने वाले अधिकांश विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक थे। 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी 19 सीटों पर विजयी रही थी जबकि कांग्रेस को नौ सीटों पर जीत मिली थी।

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