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जब सिंधिया का उदाहरण दे असंतुष्टों को नसीहत दे रहे थे राहुल,महाराज सुन रहे थे उनकी बात!

हाइलाइट्स

  • राहुल गांधी ने पार्टी छोड़ने वालों को बताया डरपोक
  • राहुल ने भाषण में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दिया उदाहरण
  • सिंधिया अपने दफ्तर में सुन रहे थे राहुल का भाषण

भोपाल
कांग्रेस (Congress) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का एक भाषण शुक्रवार दोपहर से वायरल हो रहा है। कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के पदाधिकारियों के साथ डिजिटल कार्यक्रम में राहुल ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को आरएसएस से डरा हुआ बताया। राहुल ने सिंधिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें अपना महल बचाना था, इसलिए आरएसएस के साथ चले गए। खास बात यह है कि जब राहुल यह भाषण दे रहे थे, सिंधिया उनका भाषण सुन रहे थे।

इसका खुलासा एक तस्वीर से हुआ है। यह तस्वीर शुक्रवार दोपहर की है जब सिंधिया के दफ्तर में गुना-शिवपुरी के सांसद केपी यादव उनसे मिलने पहुंचे थे। उस समय सिंधिया के दफ्तर में टीवी ऑन था। यादव जब सिंधिया को फूलों का गुलदस्ता दे रहे थे, टीवी पर राहुल की भाषण का क्लिप चल रहा था। तस्वीर में टीवी पर राहुल का चेहरा स्पष्ट दिख रहा है।

भाषण के वायरल होते ही यह चर्चा चलने लगी कि राहुल के निशाने पर कौन लोग थे। माना यह जा रहा है कि यह हाल के दिनों में पार्टी छोड़कर गए नेताओं के लिए था। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद शामिल हैं।

राहुल के करीब रहे ये दोनों नेता अब बीजेपी में हैं। सिंधिया को हाल ही में नरेंद्र मोदी कैबिनेट में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया है। प्रसाद को भी उत्तर प्रदेश में अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।

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राहुल गांधी ने अपने भाषण में सोशल मीडिया विभाग के पदाधिकारियों से कहा, ‘बहुत सारे लोग हैं जो डर नहीं रहे हैं…कांग्रेस (Congress) के बाहर हैं..उनको अंदर लाओ ।और जो हमारे यहां डर रहे हैं, उनको बाहर निकालो…चलो भैया जाओ। आरएसएस के हो, जाओ भागो, मजे लो। नहीं चाहिए, जरूरत नहीं है तुम्हारी। हमें निडर लोग चाहिए। ये हमारी आइडियोलॉजी है।’

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राहुल ने भाषण में सिंधिया का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्हें डरपोक बताकर पार्टी के असंतुष्टों को भी संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस में व्यक्ति नहीं , विचारधारा महत्वपूर्ण है। नेताओं के पार्टी छोड़ने से हतोत्साहित महसूस कर रहे कार्यकर्ताओं को भी राहुल ने बता दिया कि डरपोक लोगों के जाने से कांग्रेस को फर्क नहीं पड़ता।

दूसरी ओर, बीजेपी या सहयोगी पार्टियों के असंतुष्टों को भी उन्होंने इनडायरेक्ट मैसेज दिया। राहुल के भाषण का स्पष्ट मतलब है कि कांग्रेस (Congress) की विचारधारा में विश्वास करने वाले लोगों के लिए दरवाजे खुले हैं।

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