इंदौर में कोरोना के 50% मरीज B+ve ब्लड ग्रुप के, AB+ के सबसे कम संक्रमित

कोरोना संक्रमण का शिकार होने वालों में बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लोगों की संख्या ज्यादा है। यह निष्कर्ष इंदौर, भोपाल, उज्जैन के पांच कोविड केयर सेंटर में लगभग 17 सौ कोरोना संक्रमितों के ब्लड ग्रुप के अध्ययन से सामने आया है। भारतीय मूल के लोगों में 32% लोग ही बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के पाए जाते हैं, लेकिन संक्रमितों में लगभग आधे(47%) इसी ब्लड ग्रुप के हैं।

यह चौंकाने वाले परिणाम विदेशों में हुई स्टडी से ठीक उलट हैं। वहीं, जनसंख्या के लिहाज से भारत में ओ-पॉजिटिव ग्रुप के लोगों की संख्या भले ही सबसे ज्यादा लगभग 38% हो, लेकिन संक्रमण के शिकार लोगों में इनकी संख्या 30% से भी कम है।

मध्यप्रदेश के पांच बड़े कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों के ब्लड ग्रुप की पड़ताल की। लगभग 17 सौ कोरोना संक्रमितों के ब्लड ग्रुप के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लोग,संक्रमण को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं।

इस ग्रुप के संक्रमित लोगों की संख्या, भारत में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले ओ-पॉजिटिव ग्रुप के मुकाबले लगभग 20% ज्यादा है। जबकि राष्ट्रीय औसत के लिहाज से देखें तो बी-ग्रुप के लोगों की संख्या ओ-ग्रुप से लगभग 5-7 % कम है। इंदौर के एमआरटीबी अस्पताल के डॉक्टर दिलीप चावड़ा का कहना है कि रैंडम सैंपलिंग के आधार पर सामने आया है कि 53% मरीज बी- पॉजिटिव ग्रुप के हैं। जबकि ओ-पॉजिटिव ग्रुप के कोरोना संक्रमितों का प्रतिशत 27 है। इसके पीछे अभी कोई ठोस वैज्ञानिक कारण सामने नहीं आया है।

भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर अजय गोयनका बताते हैं कि उनके यहां करीब 40% से ज्यादा मरीजों का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव पाया गया है। उज्जैन के अमलतास मेडिकल कॉलेज और इंदौर में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर पवन बम्मानी बताते हैं कि इन दोनों मेडिकल कॉलेजों में लगभग 45-46% मरीज बी-पॉजिटिव ग्रुप के हैं। अरबिंदो मेडिकल कॉलेज(सिम्स) के आंकड़े भी लगभग यही कहानी कह रहे हैं। वहां भी संक्रमित लोगों में लगभग 48% बी-पॉजिटिव ग्रुप के मरीजों की है जो ओ-पॉजिटिव से करीब 20% ज्यादा है।

देश में सबसे ज्यादा ओ-पॉजिटिव मध्य भारत में
नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन ने भारत को 5 जोन में बांटकर स्टडी की थी। इसके अनुसार भारत के लोगों में ए-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाले 22%, बी वाले 32% और 38% ओ-पॉजिटिव वाले हैं। सेंट्रल इंडिया में ओ-पॉजिटिव ग्रुप के लोगों की संख्या देश में सबसे ज्यादा 43% है। इस रीजन में बी पॉजिटिव वाले 27% हैं।

वुहान में हुई स्टडी में ज्यादा मिले ए पॉजिटिव वाले
चीन के वुहान मे भी लगभग 22 सौ मरीजों के ब्लड ग्रुप का अध्ययन हुआ था। चाइना में ए-पॉजिटिव ग्रुप के लोग सबसे ज्यादा संक्रमण के शिकार पाए गए थे। वही संक्रमितो की सबसे कम संख्या ओ-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वालों की थी। इंडेक्स कॉलेज की प्रोफेसर अवनिंदर नैयर कहती है कि इसका मतलब यह नहीं है कि ओ ग्रुप वालों को संक्रमण का खतरा कम है। दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसी विविधता देखने को मिलती है।

ब्लड ग्रुप व कोरोना के संबंध में स्टडी चल रही
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. रवि वानखेडेकर ने बताया कि किस ब्लड ग्रुप को ज्यादा संक्रमण हो रहा है अभी तक यह सिर्फ ऑब्जर्वेशनल स्टडी है। ब्लड ग्रुप जिस जीन से तय होता है, उसका और कोरोना का क्या संबंध है इसकी रिसर्च चल रही है। इसमें अभी काफी समय लगेगा।

NZ: कोरोना फ्री होने के लिए 4 step और 43 points प्रोग्राम, 7 हफ्ते सख्त लॉकडाउन रहा